अतिरिक्त सचिव (डीपीए) विदेश मंत्रालय, भारत सरकार श्री अखिलेश मिश्र जी ने ली परमार्थ निकेतन से विदाई

  • भारतीय संस्कृति, कला, नैतिक शिक्षा, नदियों का संरक्षण आदि विषयों पर हुई चर्चा
  • शिक्षा और नैतिक शिक्षा चले साथ-साथ
  • चरित्र निर्माण हो शिक्षा का प्रमुख आधार-स्वामी चिदानन्द सरस्वती


युरेशिया 

ऋषिकेश। आज परमार्थ निकेतन से श्री अखिलेश मिश्र, अतिरिक्त सचिव (डीपीए) विदेश मंत्रालय, भारत सरकार, प्रो गिरीश चंद्र त्रिपाठी जी, चैयरमैन उच्च शिक्षा आयोग और श्री गोपाल कृष्ण अग्रवाल जी और चार्टर्ड एकाउंटेंट सौरभ पांडे ने विदा ली।

परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष श्री चिदानन्द सरस्वती जी और अतिरिक्त सचिव (डीपीए) विदेश मंत्रालय, भारत सरकार श्री अखिलेश मिश्र जी ने भारतीय संस्कृति, कला, सांस्कृतिक महोत्सवों के वास्तविक तत्वदर्शन से युवाओं को जोड़ने तथा नदियों और पर्यावरण के संरक्षण हेतु जनमानस को जागृत करने आदि विषय पर चर्चा की।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने प्रो गिरीश चंद्र त्रिपाठी जी, चैयरमैन उच्च शिक्षा आयोग से चर्चा करते हुये कहा कि वर्तमान समय में हमारे समाज में जाति, धर्म, रंग और पंथ के आधार पर जो अलगाव है वह हमारे समाज और समुदायों को ही नहीं बल्कि हमारे राष्ट्रों और दुनिया भी एक-दूसरे से अलग कर रहा है, ऐसे में युवाओं को; विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम के साथ ही नैतिक शिक्षा को नर्सरी से लेकर उच्च शिक्षा का अनिर्वाय रूप से लागू किया जाना चाहिये। 

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि समाज में आये दिन ऐसी अनेक घटनायें घट रही है जिससे लगता है कि ’नैतिक शिक्षा और चरित्र निर्माण’ को पाठ्यक्रम में एक प्रमुख विषय के रूप में रखा जाना चाहिये। वर्तमान शिक्षा प्रणाली ज्ञान और बुद्धिमत्ता पर आधारित है, जिसमें चारित्रिक विशेषता, मानवीय गुणों और व्यावहारिक ज्ञान की अपेक्षा अधिक अंकों की प्राप्ति और सैद्धांतिक ज्ञान को प्राथमिकता दी जा रही है। देखने में आया है कि बच्चों को परिवार से मिलने वाली शिक्षा भी चरित्र निर्माण से दूर होती जा रही है इसलिये पाठ्यक्रम में ज्ञान और बुद्धिमता के साथ ही चरित्र-निर्माण पर भी अधिक ध्यान देने की जरूरत है। विद्यालयी पाठ्यक्रम में ‘नैतिकता’ को शामिल किया जाए तो बच्चों को उन गुणों को व्यवहार में लाना आसान हो जायेगा।

स्वामी जी ने कहा कि वर्तमान समय में मानवीय मूल्यों में कमी आ रही है और पर्यावरण प्रदूषण में वृद्धि हो रही है इसलिये शिक्षा के साथ नैतिकता को जीवंत स्वरूप में बनायें रखना बहुत जरूरी है। परिवार, स्कूल और समाज के द्वारा ज्ञान, कौशल और बुद्धिमता के साथ चारित्रिक विकास पर पर्याप्त ध्यान दिया जाना चाहिये इससे समाज, राष्ट्र और विश्व स्तर पर विलक्षण परिवर्तन हो सकता है।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में श्री अखिलेश मिश्र, अतिरिक्त सचिव (डीपीए) विदेश मंत्रालय, भारत सरकार, प्रो गिरीश चंद्र त्रिपाठी जी, चैयरमैन उच्च शिक्षा आयोग और श्री गोपाल कृष्ण अग्रवाल जी और चार्टर्ड एकाउंटेंट सौरभ पांडे ने विश्व स्तर पर स्वच्छ जल की आपूर्ति हेतु विश्व ग्लोब का जलाभिषेक किया तत्पश्चात परमार्थ निकेतन से विदा ली।

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