विश्व वानिकी दिवस (21 मार्च) की पूर्व संध्या पर वेंक्टेश्वरा एवं ग्रीन केयर सोसाईटी के संयुक्त तत्वाधान में (नमामि गंगे) के तहत ’’गंगा स्वच्छता विचार गौष्ठी एवं काव्य संध्या’’

  • पर्यावरण संरक्षण/संवर्धन को समर्पित ’’पर्यावरण प्रहरी’’ पुस्तक का विमोचन
  • आचार्य चन्द्रशेखर शास्त्री, डाॅ0 सरोजनी ’’तन्हा’’, डाॅ0 विजय पंडित, डाॅ0 ईश्वरचन्द्र ’’गम्भीर’युवा कवि नीरज राजपूत’ जैसे ख्याति प्राप्त दिग्गज कवियों ने समां बांधा।
  • फूलो की होली खेलकर दिया ’’पर्यावरण संरक्षण’’ का संदेश
  • पाॅलीथीन मुक्त भारत एवं स्वच्छ गंगा की शपथ भी दिलायी गयी।


अनीस खान यूरेशिया ब्यूरो

मेरठ। विश्व वानिकी दिवस (21 मार्च) की पूर्व संध्या पर श्री वेंक्टेश्वरा संस्थान एवं ग्रीन केयर सोसाईटी के संयुक्त तत्वाधान में आज ’’राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन’’ (नमामि गंगे) के तहत ’’गंगा स्वच्छता विचार गौष्ठी एवं काव्य संध्या’’ का शानदार आयोजन किया गया। इसके साथ ही कार्यक्रम संयोजक डाॅ0 विजय पंडित द्वारा पर्यावरण संरक्षण पर रचित एवं कान्तिधरा साहित्य प्रकाशन द्वारा प्रकाशित काव्य संकलन ’’पर्यावरण प्रहरी’’ पुस्तक का विमोचन भी किया गया। इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को ’’स्वच्छ गंगा-निर्मल गंगा एवं पाॅलिथीन मुक्त भारत’’ की शपथ भी दिलायी गयी।

वेंक्टेश्वरा संस्थान के टैगोर भवन स्थित सभागार में आयोजित ’’गंगा स्वच्छता विचार गौष्ठी/काव्य संध्या’’ एवं ’’पर्यावरण प्रहरी’’ पुस्तक विमोचन समारोह’’ का शुभारम्भ वेंक्टेश्वरा समूह के चेयरमैन डाॅ0 सुधीर गिरि, प्रतिकुलाधिपति डाॅ0 राजीव त्यागी, मुख्य अतिथि नमामि गंगे परियोजना (जल शक्तिमंत्रालय, भारत सरकार) यू0पी0 के संयोजक श्री चन्द्र प्रकाश चैहान, ग्रीन केयर सोसाईटी के अध्यश श्री डाॅ0 विजय पंडित आदि  ने सरस्वती माँ के सन्मुख दीप प्रज्जवलित करके किया।

इसके बाद आयोजित कवि सम्मेलन में देश के विभिन्न हिस्सो से आये कवियो ने प्रेम, हास्य एवं देशभक्ति, होली के रंगो की ऐसी छटा बिखेरी कि उपस्थित जनसमूह तालिया बजाने को मजबूर हो गया युवा कवि नीरज राजपूत ने ने माहौल को प्रेम रस से सरोबार करते हुए हुए कहा कि ’’ प्रेम को ढाई अक्षर का कैसे कहें, प्रेम सागर से गहरा है नभ से बड़ा प्रेम होता है दिखता नहीं है, मगर प्रेम की ही धुरी पर यह जग है खड़ा’ सुनकर खूब बाहवाही लूटी।

डाॅ0 सरोजिनी ’’तन्हा’’ ने होली के रंगो पर यूं कहा ’’रंगो में घुली लड़की क्या लाल गुलाबी है, सब देख के कहते है क्या गाल गुलाबी है। जो पिछले बरस तूने होली पे भिगोया था, अब तक तो निशानी का रुमाल गुलाबी है।

प्रसिद्ध ककवि डाॅ0 ईश्वरचन्द्र ’’गम्भीर’’ ने मातृशक्ति को नमन करते हुए कहा कि नमन तुझे नारी बारम्बार, नमन तुझे नारी बारम्बर, तुझसे घर परिवार ही क्या, चलता सारा संसार’’। 

उत्तराखण्ड बाढ/त्रासदी पर वरिष्ठ कवि डाॅ0 अजीत कुमार ’’अजीत’’ ने कहा ’’वो हंसी के कहंकहे, वो मस्तिया गुम हो गयी, गिनते-गिनते हादसो को गिनतिया गुम हो गयी। 

बाढ में डूबे हुए घर हाथ मलते रह गये, पास उनके जाते-जाते कशतिया गुमा हो गयी। 

कवि सम्मेलन को वरिष्ठ कवि डाॅ0 रामगोपाल ’’भारतीय’’ वरिष्ठ कवि डोरीलाल भास्कर, साहित्यकार चन्द्रशेखर शास्त्री, डाॅ0 श्रीगोपाल नारसन, श्रीनितीश राजपूत, डाॅ0 विजय पंडित आदि ने भी सम्बोधित किया। प्रतिकुलाधिपति डाॅ0 राजीव त्यागी ने अतिथियों को शाॅल एवं सम्मान पत्र भेट कर सम्मानित किया। इसके बाद ध्यानचन्द्र खेल परिसर में सभी ने फूलो की होली खेलकर एवं दूसरे को बधाई दी। 

इस अवसर पर कुलपति प्रो0 (डाॅ0) पी0के0 भारती, कुलसचिव डाॅ0 पीयूष पाण्डे, परिसर निदेशक डाॅ0 प्रभात श्रीवास्तव, उपनिदेशक दूरस्थ शिक्षा अलका सिंह, रजिस्ट्रार विकास कौशिक, विश्वास त्यागी,  राहुल हाडा, विनय, मीडिया प्रभारी विश्वास राणा आदि लोग उपस्थित रहे।

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