शैक्षिक संवाद मंच ने मनाया संविधान दिवस

• शिक्षकों ने संविधान की विशेषताओं पर की चर्चा
• प्रस्तावना तथा मौलिक अधिकार एवं कर्तव्यों पर हुआ विमर्श



युरेशिया संवाददाता
बांदा।  संविधान दिवस के अवसर पर शैक्षिक संवाद मंच उ.प्र. द्वारा एक ऑनलाइन संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें पूरे प्रदेश से शिक्षकों ने जुड़कर डॉ. भीमराव अंबेडकर के योगदान को रेखांकित कर संविधान की विशेषताओं पर चर्चा करते हुए देश की एकता एवं अखंडता को सुरक्षित रखते हुए परस्पर प्रेम सद्भाव को बढ़ावा देने पर बल दिया।
        संविधान दिवस संगोष्ठी के प्रारंभ में संवाद मंच के संस्थापक शिक्षक साहित्यकार प्रमोद दीक्षित मलय ने कार्यक्रम की रूपरेखा रखते हुए कहा कि हम सभी शिक्षक हैं। संविधान दिवस पर संवाद के माध्यम से हम बच्चों एवं आमजन तक संवैधानिक मूल्यों एवं आदर्शों का प्रचार-प्रसार करेंगे। संविधान के प्रति आस्था, श्रद्धा एवं विश्वास जगाना है। इसके लिए बच्चों के साथ काम करते हुए हम लोकतांत्रिक आचरण का आदर्श प्रस्तुत करें। संगोष्ठी का आरम्म कृष्ण कुमार द्वारा प्रस्तुत चेतना गीत ' केवल बातें करने से बेड़ा पार नहीं होता' से हुआ जिसमें श्रम के महत्व और सामूहिकता पर बल दिया गया था। चर्चा का आरंभ करते हुए सुमन गुप्ता ने संविधान की प्रस्तावना पढ़ते हुए अपने विचार रखें कि समाज में भाईचारे के लिए हमको संविधान के आलोक में ही काम करना होगा। यह भी बताया कि 1976 में 42 वें संशोधन द्वारा प्रस्तावना में समाजवादी और पंथनिरपेक्ष शब्द जोड़े गए। जिसका आशय है कि राज्य किसी एक मत, पंथ, धर्म  का पक्षधर ना होकर सभी के लिए समान रूप से काम करेगा। दीक्षा मिश्रा ने मूल अधिकारों पर अपने विचार रखते हुए कहा कि संविधान में जो मूल अधिकार प्रदान किए गये हैं , उनकी गरिमा को बनाए रखते हुए हम अपने कर्तव्य की ओर भी जागृत रहें। अधिकार और कर्तव्य परस्पर अन्योन्याश्रित हैं। श्रवण गुप्ता ने संविधान निर्माण की पूरी यात्रा की झलक प्रस्तुत करते हुए बताया कि संविधान का निर्माण 2 वर्ष 11 महीने 18 दिन में पूर्ण हुआ और 26 नवंबर 1949 को अंगीकृत किया गया। संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ राजेंद्र प्रसाद थे और प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. अंबेडकर के नेतृत्व में एक पूरी टीम ने संविधान बनाने में योगदान दिया। संविधान में 395 अनुच्छेद एवं 8 अनुसूचियां थी और अभी तक 100 से अधिक संशोधन हो चुके हैं।एक गीत 'ना हो साथ कोई अकेले बढ़ो तुम, सफलता तुम्हारे चरण चूम लेगी' भी प्रस्तुत किया। नीतू शर्मा ने नीति निर्देशक तत्वों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संविधान में राज्यों एवं केंद्र के संबंधों पर बहुत स्पष्ट कार्य योजना एवं अधिकार व्याख्यायित किए गए हैं। अर्चना वर्मा ने संविधान के कुछ रोचक तथ्यों को सामने रखे कि उस समय 6 करोड़ से अधिक धन खर्च हुआ था। मूल प्रति में 284 सदस्यों के हस्ताक्षर हैं जिनमें 15 महिलाएं भी शामिल हैं। प्रेम बिहारी रायजादा ने इसको हिंदी एवं अंग्रेजी में लिखा है। नौरीन सआदत ने संविधान पर आधारित अपनी स्वरचित कविता प्रस्तुत कर वाहवाही बटोरी। सुनीता गुप्ता भी मूल अधिकारों पर चर्चा करते हुए कहा कि हम सभी देश के विकास के लिए श्रेष्ठ नागरिक का निर्माण करने में अपना योगदान करें। अर्चना सिंह ने सवाल रखते हुए कि बच्चों में लोकतांत्रिक मूल्यों एवं अनुशासन का विकास कैसे किया जाए? अपने अनुभव साझा किये। इस गोष्ठी में रेनू सिंह, रंगनाथ दुबे, धर्मेंद्र कुमार, पूनम नामदेव, राजेंद्र यादव, नीलम जैन, अमृतलाल, राम किशोर पांडेय, रुखसाना बानो, सौरभ गुप्ता, नम्रता श्रीवास्तव, शैलेंद्र शंखधर आदि शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे।

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