राष्ट्रगान में बदलाव के लिए सुब्रमण्यम स्वामी ने पीएम को लिखा पत्र, ट्विटर पर लिखा ये पोस्ट

नई दिल्लीः बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने राष्ट्रगान में बदलाव के लिए पीएम मोदी को पत्र लिखा है. स्वामी ने पीएम मोदी को भेजे गए इस पत्र को ट्विटर पर भी शेयर किया है. उन्होंने खत में कहा है कि राष्ट्रगान 'जन गण मन...' को संविधान सभा में सदन का मत मानकर स्वीकार कर लिया गया था. उन्होंने आगे लिखा है, 26 नवंबर, 1949 को संविधान सभा के आखिरी दिन अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद ने बिना वोटिंग के ही 'जन गण मन...' को राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार कर लिया था. हालांकि, उन्होंने माना था कि भविष्य में संसद इसके शब्दों में बदलाव कर सकती है. स्वामी ने लिखा है कि उस वक्त आम सहमति जरूरी थी क्योंकि कई सदस्यों का मानना था कि इस पर बहस होनी चाहिए, क्योंकि इसे 1912 में हुए कांग्रेस अधिवेशन में ब्रिटिश राजा के स्वागत में गाया गया था.

राष्ट्रीय एकता दिवस: सरदार पटेल भारत की एकजुटता के वास्तविक सूत्रधार: स्वामी चिदानन्द सरस्वती


  • महाकाव्य रामायण के प्रणेता आदिकवि महर्षि वाल्मीकि जी और हिन्दू आध्यात्मिक सन्त कवयित्री, भगवान श्री कृष्ण की अनन्य भक्त मीराबाई का जन्मदिवस



युरेशिया संवाददाता


ऋषिकश। सरदार वल्लभभाई पटेल जी के जन्मदिवस के पावन अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि सरदार पटेल जी ने रियासतों का एकीकरण ही नहीं किया बल्कि भारतीयों के दिलों का भी एकीकरण किया।
महाकाव्य रामायण के प्रणेता आदिकवि महर्षि वाल्मीकि जी का आज जन्मदिवस है। महर्षि वाल्मीकि जी ने भगवान श्री राम की गौरव गाथा, संघर्ष और साहस का उत्कृष्ट उदाहरण रामचरित्र मानस के माध्यम से प्रस्तुत किया है। रामायण में प्रभु श्री राम के जीवन अमृत की वह रसधार है, जिसकी हर बूंद से एक महाग्रंथ लिखा जा सकता है। हम धन्य हैं कि हमें प्रभु श्री राम की दिव्य लीलाओं का रामायण के माध्यम से स्वाध्याय करने का अवसर प्राप्त हुआ। प्रभु श्री राम की शरण, उनके चरण एवं उनका आचरण हमारे जीवन का पाथेय बने।


महर्षि वाल्मीकि जी को नमन, जिन्होंने ईश्वरीय विशिष्टता और दिव्य गुणों के स्वामी प्रभु श्री राम को साधारण मनुष्यों की भाँति दूसरों के सहयोग से ही अपने समस्त कार्य सम्पन्न करते हुये प्रत्येक प्राणी की उपयोगिता का रहस्य समझाया। वाल्मीकीय रामायण से हमें पितृभक्ति, भ्रातृप्रेम, पातिव्रत्य, धर्म, आज्ञापालन, प्रतिज्ञापूर्ति तथा सत्यपरायणता की शिक्षा प्राप्त होती है, आईये इन शिक्षाओं को अपने जीवन में धारण करें और जीवन यात्रा में आगे बढ़ें।


शास्त्रों से प्राप्त प्रमाण के आधार पर हिन्दू आध्यात्मिक कवयित्री, भगवान श्री कृष्ण की अनन्य भक्त मीराबाई का जन्मदिवस है। मीराबाई एक राजपूत राजकुमारी थीं, जो मेड़ता महाराज के छोटे भाई रतन सिंह की एकमात्र संतान थीं। एक साधु द्वारा बचपन में उन्हें श्री कृष्ण की मूर्ति दिए जाने के साथ ही उनकी आजन्म कृष्ण भक्ति की शुरुआत हुई, जिनकी वह दिव्य प्रेमी के रूप में आराधना करती थीं। अपने श्री मुख से अपने आराध्य के लिये गाती-नृत्य करती और झूमती मीरा बाई ने जीवन में अनेक दुखों को सहन किया परन्तु अपने आराध्य पर अनन्य प्रेम हमेशा बनाये रखा। ’’पायो जी मैंने नाम रतन धन पायो। बस्तु अमोलक दी म्हारे सतगुरु, किरपा कर अपनायो। जनम जनम की पूंजी पाई, जग में सभी खोवायो। खरच न  खूटे चोर न लेवै, दिन-दिन बढ़त सवायो। सत की नाव खेवडिया सतगुरु, भवसागर तर आयो। मीरा के प्रभु गिरधर नागर, हरख-हरख जस पायो।’’अपने ठाकुर के प्रति उनका यह अनन्य प्रेम हम सभी को प्रभु के प्रति समर्पित जीवन जीने की शिक्षा देता है।
स्वामी जी ने कहा कि भारत में राजनेता हैं, राजनीतिज्ञ हैं परन्तु राष्ट्रीय एकता के लिये नेतृत्व करने वाले मेरी दृष्टि से केवल सरदार पटेल ही ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने एकता की अद्भुत मिसाल कायम की। वे एकता के नीतिज्ञ थे, वे स्वयं राष्ट्र की सेवा में समर्पित थे और उन्होंने अपनी व्यवहार कुशलता और कुशाग्रता के बल पर देशी रियासतों के एकीकरण का प्रबंधन किया। उन्होने दूरदर्शिता के बल पर भारत जैसे लोकतांत्रिक देश की 562 स्वतंत्र रियासतों के विलय का अत्यंत जटिल और संवेदनशील कार्य अपने हाथों में लिया। रियासतों के मालिकों को देशभक्ति और राष्ट्रीय संवेदना के प्रति सजग करते हुये सभी से देश हित में कार्य करने का आह्वान किया।
भारत में सरदार वल्लभभाई पटेल के जन्मदिवस को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह वर्ष 2014 में पहली बार भारत के लौह पुरुष श्री सरदार वल्लभभाई पटेल जी को श्रद्धांजलि देने के उद्देश्य से मनाया गया था। सरदार पटेल जी ने राष्ट्रीय अखंडता और एकता हेतु महत्वपूर्ण योगदान दिया।
भारत रत्न, भारत के प्रथम गृहमंत्री और उप-प्रधानमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने भारतीय राष्ट्र को एक संघ बनाने तथा भारतीय रियासतों के एकीकरण में उनकी महत्त्वपूर्ण भूमिका थी। भारत को एक भारत और एक स्वतंत्र राष्ट्र बनाने में उन्होने महत्वपूर्ण योगदान दिया। स्वामी जी ने कहा कि वास्तव में सरदार पटेल भारत की एकजुटता के वास्तविक सूत्रधार थे। आज भी भारत को और भारत की युवा पीढ़ी को सरदार पटेल जैसे नेतृत्व की आवश्यकता है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने देश के युवाओं का आह्वान करते हुये कहा कि राष्ट्र है तो हम है, हमारे राष्ट्र ने, हमारी मातृभूमि ने हमें बहुत कुछ दिया है, अब हम सब की बारी है। ’देश हमें देता है सब कुछ हम भी तो कुछ देना सीखे।’ हमारे पूर्वजों ने राष्ट्रीयता, राष्ट्र प्रेम और राष्ट्र के प्रति संवेदना से युक्त संस्कारों का रोपण बड़ी ही सजगता से किया है, अब उस देश भक्ति के बीज को हर भारतवासी के हृदय में विकसित करना हैं ताकि वह विशाल वटवृृक्ष के रूप में विकसित होकर आगे आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करता रहे।
स्वामी जी ने कहा कि सरदार पटेल ने यह संदेश दिया कि हृदय में अगर राष्ट्रप्रेम की भावना हो तो उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम को एकता के सूत्र में बांधना मुश्किल नहीं है। आईये आज राष्ट्रीय एकता दिवस पर यह संकल्प लें कि आपसी भाईचारा बनकर रखेंगे।


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