मस्जिद चंदा विवाद हल निकालने को मुस्लिम संगठन का सराहनीय कदम


कामिल खान/युरेशिया
जालंधर।  मशहूरो मारूफ  मजहबी पेशवा मोहतरम मोलाना  कलीम सिद्दीकी की ख्वाहिश का एहतराम करते हुए मुस्लिम संगठन पंजाब का एक वफ्द मस्जिद क़ूबा के प्रधान जब्बार खान ठेकेदार की कय़ादत मे अंबाला जाकर मिला। जिसमें चेयरमैन एसएस हसन, प्रधान नईम खान एडवोकेट,जनरल सेक्रेटरी अमजद खान ठेकेदार, पत्रकार वारिस मलिक शामिल थे। वफ्द ने मोलाना  सिद्दीक़ी साहब को तफसील के साथ बताया कि कुछ लोग पूरी क़ौम को किस प्रकार बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं। एक तरफ यह लोग शहर वालों को यह कहकर गुमराह कर रहे हैैं कि हमने किसी इदारे से कोई पैसा नहीं लिया है।  हमें बदनाम करने की साजिश की जा रहि है। अगर हमने पैसा लिया है तो लोग साबित करें। खुदा के क़हर से डरने वाले शहर के लोगों ने जब यह साबित कर दिया कि पैसा आया था और पैसा देने वालों ने यह लिख कर दे दिया कि हमने पैसा दिया है। अब पौल खुल जाने के बाद यह लोग एक नया रजिस्टर हाथ में थामे लोगों को दिखाते फिर रहे हैं कि हम बे गुनाह हैं हमसे हिसाब ले लो हमारे पास एक-एक पैसे का हिसाब नोट है। अब सवाल यह पैदा होता है कि जब आपके पास पैसा आया ही नहीं था और आप चीख चीखकर कर झूठ फेला रहे थे और लोगों को चौलेंज कर रहे थे कि अगर पैसा आया है तो साबित करो। जिसके जवाब में जालंधर के गयूर मुसलमानों ने जिनके दिलों में ईमान जिंदा है और जो हर वक्त सच्चाई के साथ देने के लिए तैयार रहते हैं उन्होंने तहरीरी तौर पर और लोगों के द्वारा दिए गए एफिडेविट के जरिए यह साबित कर दिया कि पैसा आया था जिसका इस्तेमाल मस्जिद की बहबूद में ना करके खुर्द बुर्द कर दिया गया है।अब यह लोग हिसाब किस पैसे का दे रहे हैं, इनके बकौल तो इनको पैसा हासिल ही नहीं हुआ है।चोरी पकड़े जाने के बाद अब इस टीम ने जिन का इमान शक के दायरे में है, उन्होंने लोगों के सवालों से बचने के लिए एक बार फिर साहिबे ईमान लोगों को गुमराह करने की गरज से एक दूसरी शैतानी चाल चालते हुए मस्जिद कूबा के बानिए(संस्थापक) सदर जनाब जब्बार खान को हटाकर एक नए साहब को गले में हार डाला कर सदर बना दिया ताकी वे लोगों को एक बार फिर गुमराह कर सकें कि यह मसला चंदे का नहीं बल्कि सदारत को लेकर है। मुस्लिम संगठन पंजाब के जरिए किए गए इन खुलासों को
मोहतरम मोलान  सिद्दीकी साहब ने बहुत संजीदगी के साथ सुना और मसले के हल निकालने की तरफ पाहल करते हुए कहा कि मुझे 3 दिन का टाइम दें। मै  कोई मुनासिब हल निकालता हूं।
अध्यक्ष नईम खान एडवोकेट ने तमाम खुलासों के बाद मौहतरम मोलाना  सिद्दीकी साहब से कहा- हमें आपकी इमानदारी और दयानतदारी पर पूरा भरोसा है पर फैसला देते वक़्त इतना ख्याल जरूर रखें कि मस्जिद के नाम पर जो पैसा आया है वह मस्जिद को मिलाना चाहिए। मस्जिद क़ौम की अमानत होती है और क़ौम किसी भी स्थिति में किसी भी तरह पैसे की हेरा फेरी में किसी तरह की बहाने बाजी बर्दाश्त नहीं करेगी। जब्बार खान ने मौहतरम सिद्दीकी साहब को तफसील से बताया कि मस्जिद की जमीन की खरीदारी के मौके पर ठेकेदार यूनियन और शहर के मुअजजिज लोगों से मैंने चंदा करके तकरीबन 22 लाख रुपेय मस्जिद पर खर्च किए हैं जिसका हिसाब उनके पास मौजूद है, विवादित रक़म इन पैसों में शामिल नहीं है।
अमजद खान ने कहा कि झूठ के पैर बहुत कमजोर होते हैं और जब वो झूठ नूरे ईमानी से मुनव्वर लोगों के दरमियान बोला जाए तो बहुत दूर तक जिंदा नहीं रह पाता उन्होंने कहा मुझे यकीन है कि दूध का दूध और पानी का पानी जल्द हो जाएगा और कौम से गद्दारी करने वाले शहर को मूहं खाने के काबिल नहीं रहेंगे।
दोस्तों जैसा कि हमने आपसे वादा किया था कि मस्जिद के नाम पर आए चंदे के विवाद के बारे में हम आपको अपडेट करते रहेंगे ताकी किसी प्रकार की गलत फैहमी या अफवाहों का आप शिकार ना हो जाएं। मुस्लिम संगठन पंजाब ने इस सिलसिले में जो कोशिशें व कार्रवाई अभी तक की है उसकी मुख्तसर रिपोर्ट आपके सामने पेश है।