राष्ट्रगान में बदलाव के लिए सुब्रमण्यम स्वामी ने पीएम को लिखा पत्र, ट्विटर पर लिखा ये पोस्ट

नई दिल्लीः बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने राष्ट्रगान में बदलाव के लिए पीएम मोदी को पत्र लिखा है. स्वामी ने पीएम मोदी को भेजे गए इस पत्र को ट्विटर पर भी शेयर किया है. उन्होंने खत में कहा है कि राष्ट्रगान 'जन गण मन...' को संविधान सभा में सदन का मत मानकर स्वीकार कर लिया गया था. उन्होंने आगे लिखा है, 26 नवंबर, 1949 को संविधान सभा के आखिरी दिन अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद ने बिना वोटिंग के ही 'जन गण मन...' को राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार कर लिया था. हालांकि, उन्होंने माना था कि भविष्य में संसद इसके शब्दों में बदलाव कर सकती है. स्वामी ने लिखा है कि उस वक्त आम सहमति जरूरी थी क्योंकि कई सदस्यों का मानना था कि इस पर बहस होनी चाहिए, क्योंकि इसे 1912 में हुए कांग्रेस अधिवेशन में ब्रिटिश राजा के स्वागत में गाया गया था.

हाफिज गुलाम  कादर शाह कादरी का 94 वां उर्स मुबारक कुल की रस्म के साथ संपन्न हुआ


कामिल खान/युरेशिया 
जालंधर। हजरत हाफिज गुलाम  कादर शाह कादरी  का 94 उर्स मुबारक जालंधर नकोदर चौक नकवी कॉलोनी में  इस बार बड़ी सादगी पूर्ण ढंग से संपन्न हुआ उर्स मुबारक मुस्लिम नेशनल फ्रंट पंजाब के प्रधान सैयद याकूब हुसैन नकवी की सदारत में हुआ जायरीनों ने चादर पेश की दरगाह पर फूल अगरबत्ती इत्र चढ़ाए इसी दौरान फातिहा पढ़ी गई दुआएं मांगी गई कुरआन  ए पाक की तिलावत की गई सलाम पेश किया गया और कुल की रस्म अदा की गई इस दौरान जायरीनो  ने अमन चौन की दुआएं मांगी ।। मुस्लिम नेशनल फ्रंट पंजाब के प्रधान सैयद याकूब हुसैन नकवी ने कहा की हजरत हाफिज गुलाम पीर कादर शाह कादरी  सभी अकीदत मंदो की मुरादे पूरी करते हैं  दरगाहे हमेशा से ही देश व दुनिया को भाईचारे का संदेश देती चली आ रही है मूसा इमा ने उर्स की मुबारकबाद देते हुए कहा कि सच्चे दिल से की गई दुआएं अवश्य पूरी होती हैं बता दें कि जालंधर नकोदर चौक नकवी कलोनी में ऐसा दरबार है जहां महान सूफी संत हजरत हाफिज गुलाम कादर शाह कादरी के 94 वें सालाना उर्स के मौके पर शहरों से लोग मत्था टेकने और दुआ मांगने आते हैं गरीब नवाज फाउंडेशन के पंजाब चौरमेन  अकबर अली ने कहा की हाफिज गुलाम  कादर शाह कादरी के आस्ताने पर मुंह मांगी मुराद पूरी होती है जिनकी झोलियां औलाद से खाली रहती हैं तो उन्हें इन की दुआ से औलाद की खुशी नसीब होती है उर्स के मौके पर कुछ इसी तरह का नजारा देखने को मिला जिनकी झोलियां मुरादों से भरी वो यहां अल्लाह का शुक्र अदा करने आए कादरी सिलसिले से ताल्लुक रखने वाले हजरत हाफिज गुलाम  कादर शाह कादरी  का ये वह दरबार है जहां से हर धर्म और मजहब के लोग बड़े अदब के साथ हाजिरी देते हैं और सालों से यही सिलसिला चलता आ रहा है
हाफिज गुलाम कादर शाह कादरी की दरगाह पर हर साल होने वाले उर्स में पंजाब शहर के अलावा और भी शहरों से अकीदत मंद आते है। इस अवसर पर सैयद याकूब हुसैन नकवी, मूसा ईमा, मोहम्मद सलीम परधान, मोहम्मद अकबर अली,  कामिल खान, हाफिज मीर मसूद आलम, मौलाना आशिक रजा , कारी नेमतुल्लाह मोहम्मद नसीम,  दिलशाद अहमद, मोहम्मद नौशाद, रियाज अहमद,  मोहम्मद इरशाद, मोहम्मद यूनुस,  मोहम्मद मुकीम, अशोक कुमार सेवादार,  आदि मौजूद रहे।


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