2 6 जनवरी को किसानों की ट्रैक्टर रैली पर आदेश पारित करना हमारा काम नहीं : सुप्रीम कोर्ट

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नयी दिल्ली  (एजेंसी)।  सुप्रीम कोर्ट ने 26 जनवरी की प्रस्तावित ट्रैक्टर रैली को लेकर दायर याचिका पर केंद्र सरकार से कहा कि आप प्राधिकार हैं और आपको इससे निपटना है, इसपर आदेश पारित करना अदालत का काम नहीं है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा 26 जनवरी को किसानों की प्रस्तावित ट्रैक्टर रैली को पुलिस का मामला बताए जाने के बाद मामले में न्यायालय से हस्तक्षेप के अनुरोध वाली याचिका वापस ली।

बढ़ते डीजल पेट्रोल के दामों पर कांग्रेसियों ने केंद्र सरकार को कोसा


यूरेशिया संवाददाता
मवाना-बढ़ते डीजल पेट्रोल के दामों पर कांग्रेसियों ने केंद्र सरकार को कोसते हुए राष्ट्रपति के नाम उप जिलाधिकारी मवाना को ज्ञापन सौंपा। कांग्रेसियों ने आरोप लगाया कि लॉकडाउन के पिछले तीन माह के दौरान पेट्रोल डीजल पर लगने वाले केंद्रीय उत्पाद शुल्क और कीमतों में बार-बार की गई अनुचित बढ़ोतरी ने भारत के नागरिकों को असीम पीडा व परेशानिया दी है। जहां एक तरफ देश स्वास्थ्य एवं आर्थिक महामारी से लड़ रहा है। वही दूसरी और मोदी सरकार पेट्रोल-डीजल की कीमतों और उस पर लगने वाले उत्पाद शुल्क को बार-बार बढ़ाकर इस मुश्किल वक्त में मुनाफाखोरी कर रही है। मोदी सरकार द्वारा भारत के नागरिकों से की जा रही जबरन वसूली एकदम स्पष्ट परिलक्षित हो रही है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति के नाम उप जिलाधिकारी मवाना को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बताया कि 6 वर्ष पूर्व भाजपा ने सत्ता संभाली थी। पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 9.20 रुपए प्रति लीटर व डीजल पर 3.46 रूपए प्रति लीटर था। पिछले सालों में केंद्र की भाजपा सरकार ने पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 23.78 रुपए डीजल पर 28.37 रुपए प्रति लीटर अतिरिक्त बढ़ोतरी कर दी है। पिछले 6 सालों में भाजपा सरकार द्वारा डीजल के उत्पाद शुल्क में 820 प्रतिशत व पेट्रोल के उत्पाद शुल्क में 258 प्रतिशत की वृद्धि की गई। कांग्रेसियों ने आरोप लगाया कि पेट्रोल और डीजल में उत्पाद शुल्क बार बार बढ़ोतरी करके भाजपा सरकार ने 18 लाख करोड़ रुपए कमा लिए है। तीन माह पहले लॉकडाउन लगाए जाने के बाद पेट्रोल में डीजल का उत्पाद शुल्क को बार-बार बढ़ा कर तो मुनाफाखोरी और जबरन वसूली की सभी हदें पार कर दी गई। पिछले साढ़े तीन महीनो में भाजपा सरकार ने डीजल पर मूल्य और उत्पाद शुल्क 26.48 रूपए प्रति लीटर व  पेट्रोल पर 21.50 रूपए प्रति लीटर बढ़ा दिया। एक सरकार द्वारा देश के नागरिकों का इससे ज्यादा शोषण और क्या हो सकता है। देश के नागरिकों से छल करने और उनकी गाड़ी कमाई की जबरन वसूली का अंदाजा इस बात से लग सकता है कि पिछले कुछ महीनों में कच्चे तेल के भाव कम हुए है। 24 जून 2020 को कच्चे तेल का अंतरराष्ट्रीय भाव 43.4 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल था। जो डॉलर रूपए भाव के अनुसार 3288.71 रुपये प्रति बैरल बनता है। एक बैरल में 159 लीटर होते है। इसलिए 24 जून को कच्चे तेल का प्रति लीटर 20.68 रूपए बनता है। इसके विपरित पेट्रोल डीजल के मूल्य आसमान छूकर 80 रूपए प्रति लीटर पहुंच गए है। जिससे साबित होता है कि मोदी सरकार भारत के भोले भाले नागरिको की जेब पर डाका डालकर उन्हें खसौट रही है।कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति के नाम उप जिलाधिकारी को ज्ञापन देते हुए 5 मार्च 2020 के बाद से पेट्रोल डीजल के दामों पर उत्पाद शुल्क में की गई बढ़ोतरी को तत्काल वापस लिए जाने की मांग की है। ज्ञापन सौंपने वालों में जिलाध्यक्ष अवनीश काजला के अलावा नगर पालिका परिषद के चेयरमैन अय्यूब कालिया, इलियास कुरैशी, राजेंद्र कुमार जाटव, सपना सोम, वल्लभ एडवोकेट, आशाराम, विनोद कामिल आदि मौजूद रहे।


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