विनायक विद्यापीठ के छात्र रिकान्त नागर ने राज्य स्तर पर प्राप्त किया प्रथम स्थान

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प्रयागराज में आयोजित 54वीं उत्तर प्रदेश राज्य वार्षिक एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में जीता स्वर्ण पदक युरेशिया विनायक विद्यापीठ महाविद्यालय ने एक बार फिर जीत का परचम लहराकर राज्य स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया है। बीए द्वितीय वर्ष के छात्र रिकांत नागर ने प्रयागराज के मदन मोहन मालवीय स्पोर्ट्स स्टेडियम द्वारा आयोजित 54वीं उत्तर प्रदेश राज्य वार्षिक एथलेटिक्स प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन दिया है। रिकांत ने अंडर - 20 इवेंट में 110 हर्डल रेस में प्रथम स्थान प्राप्त कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। और 400 हर्डल रेस में कांस्य पदक हासिल किया। संस्थान के चेयरमैन डॉ सोमेंद्र तोमर हमेशा ही बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रयासरत रहते हैँ। वह स्वयं भी खेल कूद से जुड़े रहते हैँ व छात्र छात्राओं को भी प्रेरित करते हैँ। रिकांत के इस प्रदर्शन पर उन्होंने विशेष शुभकामनायें प्रेषित की। इस मौके पर संस्थान की प्राचार्या डॉ उर्मिला मोरल ने बुके व सर्टिफिकेट देकर रिकांत को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि वह बेहद गौरवान्वित महसूस करती हैँ ज़ब भी संस्थान के छात्र छात्रा विभिन्न क्षेत्रों में अपना उम्दा प्रदर्शन

युवा ब्राह्मण समाज ने की धार्मिक स्थलों को खोलने की मांग


यूरेशिया संवाददाता 


 मेरठ, युवा ब्राह्मण समाज रजि. के अध्यक्ष पंडित अश्वनी कौशिक और सलाहकार समिति सदस्य प्रशांत कौशिक ने आज संयुक्त रुप से  धार्मिक स्थलों को खोलने की मांग करते हुए इस से सम्बन्धित मांग पत्र टि्वटर के माध्यम से प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के टि्वटर हैंडल पर प्रेषित कर इस सम्बन्ध में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से उचित दिशा निर्देश जारी करने की मांग की । पंडित अश्वनी कौशिक और प्रशांत कौशिक ने कहा कि सरकार ने अनलॉकडाउन प्रथम में विभिन्न तरह की व्यवसायिक गतिविधियों के सुचारू संचालन की इजाजत देने के साथ अन्य गतिविधियों को सामान्य बनाने की दिशा में दिशा निर्देशों के द्वारा नियंत्रित करने की बात कह कर गतिविधियों शुरू करने की इजाजत दे दी है इसलिए अन्य गतिविधियों के साथ धार्मिक स्थलों को भी खोलने की बात होनी चाहिए है । केन्द्र और प्रदेश सरकार को इस सम्बन्ध में विचार करना चाहिए कि जब व्यवसायिक गतिविधियों में सामानों की आवाजाही शुरू हो रही है, लोगों के हाथों से सामान का वितरण हो रहा है, लोग दुकानों में इकट्ठा हो रहे हैं तब धार्मिक स्थलों पर लागू दिशा निर्देश के सन्दर्भ में सरकार को पुनः विचार करना चाहिए और व्यवहारिकता के अनुकूल दिशा निर्देशों में परिवर्तन करना चाहिए क्योंकि धार्मिक स्थलों के माध्यम से बहुत सारे लोगों की आजीविका का भी प्रबंध होता है, जैसे प्रसाद, फूलमाला, अगरबत्ती, धूपबत्ती, धार्मिक पुस्तकें बनाने और बेचने वालों के साथ धार्मिक स्थलों की व्यवस्था को व्यवस्थित करने वाले पुजारी, आचार्य जैसे लोगों की आजीविका का माध्यम धार्मिक स्थल ही है इसलिए अन्य व्यवसायिक गतिविधियों की तरह धार्मिक स्थलों की गतिविधियों को सामान्य बनाने की दिशा में भी केन्द्र सरकार को सार्थक दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए और उन्हें खोलने की इजाजत देकर इन धार्मिक स्थलों से जुड़े लोगों की आजीविका को सामान्य बनाने की दिशा में सरकारों को कदम उठाने चाहिए जिससे धार्मिक स्थलों से जुड़े लोगों के सामने आ रही आर्थिक परेशानियां दूर हो सकें ।


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