विनायक विद्यापीठ के छात्र रिकान्त नागर ने राज्य स्तर पर प्राप्त किया प्रथम स्थान

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प्रयागराज में आयोजित 54वीं उत्तर प्रदेश राज्य वार्षिक एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में जीता स्वर्ण पदक युरेशिया विनायक विद्यापीठ महाविद्यालय ने एक बार फिर जीत का परचम लहराकर राज्य स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया है। बीए द्वितीय वर्ष के छात्र रिकांत नागर ने प्रयागराज के मदन मोहन मालवीय स्पोर्ट्स स्टेडियम द्वारा आयोजित 54वीं उत्तर प्रदेश राज्य वार्षिक एथलेटिक्स प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन दिया है। रिकांत ने अंडर - 20 इवेंट में 110 हर्डल रेस में प्रथम स्थान प्राप्त कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। और 400 हर्डल रेस में कांस्य पदक हासिल किया। संस्थान के चेयरमैन डॉ सोमेंद्र तोमर हमेशा ही बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रयासरत रहते हैँ। वह स्वयं भी खेल कूद से जुड़े रहते हैँ व छात्र छात्राओं को भी प्रेरित करते हैँ। रिकांत के इस प्रदर्शन पर उन्होंने विशेष शुभकामनायें प्रेषित की। इस मौके पर संस्थान की प्राचार्या डॉ उर्मिला मोरल ने बुके व सर्टिफिकेट देकर रिकांत को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि वह बेहद गौरवान्वित महसूस करती हैँ ज़ब भी संस्थान के छात्र छात्रा विभिन्न क्षेत्रों में अपना उम्दा प्रदर्शन

यूपी में गोवध निवारण कानून में बदलावः अब गोहत्या पर 10 साल की सजा, 5 लाख तक का जुर्माना लगेगा


यूरेशिया संवाददाता


उत्तर प्रदेश सरकार गोवंशीय पशुओं की रक्षा और गोकशी की घटनाओं से जुड़े अपराधों को रोकने लिए अब और  सख्ती करने जा रही है। इसके तहत इस तरह के अपराधों को संज्ञेय व गैरजमानती बनाया जाएगा। दंड व जुर्माने को भी बढ़ाया जाएगा। गोकशी करने पर अब दस साल की सजा होगी। अभी तक गोवंश को नुकसान पहुंचाने पर सजा का प्रावधान नहीं था। अब इसमें एक साल से सात साल तक की सजा का प्रावधान कर दिया गया है। इस कदम से  गोवंशीय पशुओं को हानि पहुंचाने व उनके गैरकानूनी व अनियमित परिवहन पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।


इसके लिए सरकार उत्तर प्रदेश गो-वध निवारण (संशोधन) अध्यादेश-2020 लाएगी।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इसके मसौदे को मंजूरी दे गई। विधानमंडल सत्र होने पर इसे विधेयक के रूप में दोनों सदनों से पास कराया जाएगा। इसका मकसद गोकशी की घटनाओं व गोवंश से जुड़े अपराधों को पूरी तरह रोकना है।  



  • गोकशी करने पर अब दस साल की सजा


जो कोई धारा -3, धारा-5 या धारा-5 ‘क’ के उपबन्धों का उल्लंघन करता है या उल्लंघन करने का प्रयास करता है या उल्लंघन करने के लिए दुष्प्रेरित करता है, वह तीन साल से 10 साल की सजा पाएगा।  जुर्माना तीन लाख से पांच लाख तक होगा। अगर एक बार दोष सिद्ध होने के बाद पुन: अपराध करते पाया गया तो उसे दोहरे दंड  से दंडित किया जाएगा।   ऐसे अपराधों के अभियुक्तों का नाम, फोटोग्राफ, उसका निवास स्थल है, प्रकाशित किया जाएगा।



  • गोमांस निकला तो चालक, वाहन मालिक व आपरेटर पर होगी कार्रवाई


अगर  सक्षम प्राधिकारी या प्राधिकृत प्रयोगशाला द्वारा गोमांस की पुष्टि हुई तो वाहन  चालक, आपरेटर और वाहन स्वामी पर अधिनियम के अधीन कार्रवाई की जाएगी। अगर यह सिद्ध हो जाए कि  परिवहन के साधन की समस्त सावधानियों के होते हुए और उसकी जानकारी के बिना अपराध में प्रयुक्त परिवहन के साधन का इस्तेमाल अपराध करने के निमित्त किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किया गया है। तो इस दायरे से बाहर होगा।



  • बरामद गाय के भरण-पोषण का खर्चा देना होगा


जो गाय बरामद होंगी और उनके गोवंश के  भरण-पोषण पर व्यय की वसूली अभियुक्त से एक वर्ष की अवधि तक अथवा गाय या गोवंश को निर्मुक्त किए जाने तक, जो भी पहले हो, स्वामी के पक्ष में की जाएगी।



  • गोवंशीय  पुशओं को नुकसान पहुंचाने पर तीन लाख तक जुर्माना


गोवंशीय पशुओं को शारीरिक क्षति द्वारा उनके जीवन को संकट में डालने अथवा उनका अंग-भंग करने और गोवंशीय पशुओं के जीवन को संकट में डालने वाली परिस्थितियों में परिवहन किए जाने पर अब तक दंड नहीं था। अब यह अपराध करने  पर कम से कम एक वर्ष का कारावास होगा और 7 वर्ष तक हो सकता है। जुर्माना एक लाख से तीन लाख तक हो सकता है।


सरकार का कहना है कि उत्तर प्रदेश गोवध निवारण अधिनियम-1955 की धारा-8 में गोकशी की घटनाओं के लिए 7 वर्ष की अधिकतम सजा का प्राविधान है। उक्त घटनाओं में शामिल लोगों की जमानत होने के मामले बढ़ रहे हैं। गोकशी की घटनाओं से जुड़े अभियुक्तों द्वारा  न्यायालय से जमानत प्राप्त होने के बाद दोबारा ऐसी घटनाओं में संलिप्त होने के प्रकरण सामने आए हैं।


अखिल भारतीय गोरक्षा महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष मयंक त्यागी ने कहा कि गोवध निवारण कानून को और अधिक मजबूत बनाने के मकसद से उप्र कैबिनेट ने 1955 के इस कानून में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी है यह योगी सरकार का सराहनीय कार्य है। हम इसका समर्थन करते हुए सरकार के इस फैसले का स्वागत करते है। उन्होंने कहा कि इस कानून के पारित होने के बाद गोहत्याओं पर अंकुश लगेगा और हमारी गौमाता की रक्षा हो सकेगी। 


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