केनरा बैंक(पूर्व सिंडिकेट) की ब्रांच का हुआ शुभारंभ

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फोटो परिचय:-शुभारंभ करते हुए रीजनल मैनेजर देवराज सिंह  डॉ असलम यूरेशिया बहसूमा। नगर के हसापुर रोड पर केनरा बैंक सिंडिकेट की ब्रांच स्थानांतरण करने के बाद शुभारंभ किया गया। शुभारंभ करने के बाद रीजनल मैनेजर देवराज सिंह ने कहा कि केनरा बैंक की नई जगह ब्रांच खोलने से ग्राहकों को परेशानी का सामना करना नहीं पड़ेगा। आसानी से अपना पैसा जमा या निकाल सकते हैं। अलग-अलग जमा करने एवं निकालने की डेक्स बनाई गई है। जिससे ग्राहकों को आसानी से पैसा जमा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 114 वर्ष पूर्व हमारे संस्थापक अंबेबल सुब्बाराव पई मंगलूर कर्नाटक में एक संस्थान की न्यू रखी गई जो कि आज भारत के प्रमुख वाणिज्यिक बैंकों में से एक है और 1910 में केनरा बैंक के रूप में पल्लवित हुआ। उन्होंने कहा कि सुब्बाराव पई एक महान मानव प्रेमी होने के साथ-साथ समाजसेवी भी थे। जिनके विचारों में एक अच्छा बैंक ने केवल समाज का वित्तीय हृदय होता है। उन्होंने कहा कि केनरा बैंक की 10403 शाखाएं और 13406 एटीएम जो 8.48.00.000 लोगों से ज्यादा बढ़ते आधार की सभी जरूरतों को पूरा कर रहे हैं। विदेश में बैंक की 8 शाखाएं हैं। डिविजनल मैनेजर अनुर

'सब्र का माह है रमजान,  न डालों जोखिम में जान !

 


इस्लाम में ईमान, नमाज़, ज़कात, रोज़ा एवं हज़ अनिवार्य है । रोज़ा यानी रमज़ान का महीना, यह मुस्लिमों के लिए सब्र, इबादत, तौबा, पवित्रता एवं रहमतों का महीना है, इस महीने धार्मिक ग्रन्थ कुरआन पाक 30 पारों में तीस दिन अवतरित हुआ था, इसलिए इस माह पूरी कुरआन पाक तरावीह के रूप में पढ़ी जाती है। रोज़ा सुबह पौ फटने से लेकर सूर्यास्त तक बिना अन्न-जल ग्रहण करने वाला उपवास है, इसमें केवल भूखा-प्यासा ही नहीं बल्कि अपनी आँखों, कानों, विचारों एवं समस्त इंद्रियों पर अंकुश रखा जाना चाहिए । रोज़ा हमें सब्र, हमदर्दी, मानवता, नरमी, एहसास एवं दूसरों का ख्याल रखना सिखाता है। 


     इस समय पूरी दुनिया अदृश्य वायरस कोरोना कोविड-19 से एक साथ लड़ रही है, वर्तमान में इसकी दवा न होने के कारण इसका इलाज केवल लोकडाउन है, अतः लोकडाउन के दौरान प्रशासन की गाइडलाइन का अनुशासन में रहते हुए पालन करें । ये हम सबकी भलाई के लिए है, दो गज शारीरिक दूरी का ख्याल रखें, चेहरे पर मास्क लगाएं एवं हाथों को साबुन से अच्छी तरह से धुलें और जरूरी काम से ही बाहर निकले । लोकडाउन में अच्छी बात यह है कि हमारे पास इबादत के लिए समय ही समय है, अतः रोज़े रखें और घरों में रहकर ही जुमा, अलविदा व अन्य नमाज़े पढ़ें । इफ्तार के समय अल्लाह रोजेदारों की ओर से माँगी गई हर दुआ क़ुबूल करता है । खाने-पीने की चीजें खरीदने में सब्र व संयम बरतें । झूठी अफवाहों, झूठ बोलने, चुगली करने, निंदा करने एवं गुनाहों से बचने की पूरी कोशिश करें और दौलतमंदों की जिम्मेदारी है कि वे इफ़्तार पार्टी न करके गरीब, मजबूर, लाचार एवं दुखियों को ढूंढ़कर उनकी मदद व सेवा करें, चाहे वह किसी भी धर्म या मज़हब से ताल्लुक रखता हो । इस माह में रोजे रखकर अपने मुल्क की शान्ति, खुशहाली व समृद्धि के लिए अल्लाह ताला से दुआएँ करें कि हमारे मुल्क में जाति व मज़हब के नाम पर होने वाली हिंसा ना होने पाए ।


     जैसे ही रमज़ान का पवित्र महीना समाप्त होता है, शव्वाल माह के पहले दिन ईद-उल-फित्र के रूप में मनाया जाता है, ईद का अर्थ है, वापस लौट कर आना अर्थात वापसी । यह बरकतों वाला माह, हर वर्ष 11 माह बाद फिर लौट कर आता है और बरक़तें देता है, इसलिए रमज़ान माह पूरा होते ही, ईद (खुशी) का त्यौहार मनाया जाता है । इस्लाम के मानने वाले हर मुस्लिम पर ईद की नमाज़ अनिवार्य है, जो ईदगाह में अदा की जाती है, जहाँ ईदगाह नहीं है वहाँ मस्जिदों में ही नमाज़ अदा की जाती हैं । लेकिन इस बार कोरोना महामारी के कारण संक्रमण से बचने के लिए ईदगाह और मस्जिदों में नमाज़ अदा करने की बजाय सब अपने-अपने घरों में ही नमाज़ अदा करें । ईद की नमाज़ से पहले फ़ितरा निकालकर ग़रीबों में तकसीम करें, जिससे कि उनके घरों में भी खुशियाँ लौट आए । घरों में रहकर ही पकवान बनाए और आनंद ले, इस बार दूसरों के घरों में जाने एवं उन्हें अपने घरों में बुलाने से बचें । अपने मित्रों एवं रिश्तेदारों को मोबाइल पर ही ईद की बधाई दें । ईद की नमाज़ के बाद पूरी दुनिया में अमन-चैन के लिए एवं कोरोना महामारी के ख़ात्मे के लिए अल्लाह ताला से दुआएँ करें और अंत में यही कहूँगा :
  "सब्र का माह है रमज़ान,
         न डालों जोखिम में जान !
  इबादत, तौबा व ईमान,
         सच्चे मोमिन की पहचान !!"



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