विम्स मेडिकल काॅलेज में "मिशन शक्ति अभियान एवं महिला सशक्तिकरण" पर दो दिवसीय आत्मरक्षा शिविर का आयोजन

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हिमा दास, बछेन्द्रीपाल, मैरीकाॅम, किरन बेदी जैसी विख्यात मातृशक्ति ने केवल मानसिक मजबूती एवं सघर्ष के दम पर पूरी दुनिया में भारत का डंका बजाया- डाॅ सुधीर गिरि, चेयरमैन, वेंक्टेश्वरा समूह अनीस खान यूरेशिया ब्यूरो मेरठ। राष्ट्रीय राजमार्ग बाईपास स्थित श्री वेंक्टेश्वरा विश्वविद्यालय द्वारा संचालित विम्स मेडिकल काॅलेज में मिशन शक्ति अभियान के तहत महिला सशक्तिकरण की दिशा में प्रभावी पहल करते हुए मेडिकल एवं नर्सिंग की छात्राओ के लिए दो दिवसीय आत्मरक्षा शिविर का शानदार आयोजन किया गया। इस अवसर पर अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के लिए विभिन्न क्षेत्रो में राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी शानदार उपस्थिति दर्ज कराने वाली 82 महिलाओ एवं बालिकाओ को लक्ष्मीबाई नारी/बालिका शक्ति सम्मान 2021 से नवाजा गया। विश्वविद्यालय के डाॅ सीवी रमन सभागार में आयोजित दो दिवसीय आत्मरक्षा शिविर एवं लक्ष्मीबाई नारी/ बालिका शक्ति सम्मान-2021 समारोह का शुभारम्भ वेंक्टेश्वरा समूह के चेयरमैन डाॅ सुधीर गिरि, प्रतिकुलाधिपति डाॅ राजीव त्यागी, डीन मेडिकल बिगे्रडियर डाॅ सतीश अग्रवाल, नर्सिंग डीन डाॅ एना ब्राउन, विख्यात स्

लागत के आधे दाम में फसल बेचने को मजबूर कर रही सरकार: आतिर 



  • सरकार पर किसानों का  शोषण करने का लगाया आरोप


यूरेशिया संवाददाता


मेरठ-बहुजन समाज पार्टी मेरठ के पूर्व जिला  उपाध्यक्ष आतिर रिजवी ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा रोज़ घोषणाएं की जा रही है। परंतु धरातल पर लोगो को कुछ नही मिल रहा है।
उत्तर प्रदेश सरकार अन्य प्रदेश से अपने प्रदेश के सभी श्रमिकों को लाने में नाकामयाब रही है। जिन लोगो को ला पाई है। उन लोगो के उपचार/टेस्टिंग की कोई व्यवस्था नही की है। सरकार द्वारा कहा गया था कि गांव में श्रमिको को मनरेगा के तहत रोज़गार दिया जायेगा। जिनमे अभी तक कोई कार्यवाही नही की गई। उत्तर प्रदेश में 66 प्रतिशत लोग किसान है। किसान का जमकर शोषण वर्तमान सरकार कर रही है। सरकार किसानों के साथ जुमलेबाजी करने में व्यस्त है। सरकार पर गन्ना किसानों का 15000 करोड़ से ऊपर बकाया है। जिसकी कोई चिंता सरकार को नही है। किसान का आधे से ज्यादा गन्ना खेत मे खड़ा है। गन्ना अधिकारी रिसर्वे के नाम पर गन्ना पर्ची किसान को नही दे रहे है। किसान लॉक डाउन में बुरी तरह आहत है। प्रदेश सरकार द्वारा गेंहू किसानों का जमकर शोषण किया जा रहा है। सरकार द्वारा 1925 रुपए प्रति क्विंटल गेंहू का मूल्य निर्धारित किया गया है। जिसमे 20 रुपए प्रति क्विंटल मजदूरी/सफाई का सरकार मंडी परिषद के माध्यम अपने आप देती थी। परंतु इस बार सरकार ने वो 20 रुपए किसान से काटना शुरू कर दिया। जो सरासर गलत है। इस बार किसान का गेंहू क्रय केंद्र  पर रजिस्ट्रेशन कराया जा रहा है। किसान से गेंहू लेकर उसे भुगतान के बारे में नही बताया जा रहा है। कि भुगतान कब होगा क्रय केंद्र गांव स्तर पर नही बनाये गए है।जो बनाये गए है उनमें गेंहू लेने के लिए पर्याप्त बारदाना नही है।किसान बिचौलियों को गेंहू बेचने को मजबूर है। किसान को फसल का दुगना दाम देने का सपना दिखाने वाली सरकार किसान को लागत के आधे दाम में फसल को बेचने को मजबूर कर रही है।
रिजवी ने कहा कि प्रदेश के किसानो का अविलंब गन्ना भुगतान कराया जाए और प्रदेश के गेंहू क्रय केंद्रों का निरीक्षण कराया जाए। उनकी संख्या बढ़ाई जाए। सरकार द्वारा घोषित 1925 रुपये प्रति क्विंटल का भुगतान किसान का हो। 20 रुपये प्रति वर्ष की भांति सरकार अपनी ओर से सफाई ढुलाई का दे।


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