विम्स मेडिकल काॅलेज में "मिशन शक्ति अभियान एवं महिला सशक्तिकरण" पर दो दिवसीय आत्मरक्षा शिविर का आयोजन

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हिमा दास, बछेन्द्रीपाल, मैरीकाॅम, किरन बेदी जैसी विख्यात मातृशक्ति ने केवल मानसिक मजबूती एवं सघर्ष के दम पर पूरी दुनिया में भारत का डंका बजाया- डाॅ सुधीर गिरि, चेयरमैन, वेंक्टेश्वरा समूह अनीस खान यूरेशिया ब्यूरो मेरठ। राष्ट्रीय राजमार्ग बाईपास स्थित श्री वेंक्टेश्वरा विश्वविद्यालय द्वारा संचालित विम्स मेडिकल काॅलेज में मिशन शक्ति अभियान के तहत महिला सशक्तिकरण की दिशा में प्रभावी पहल करते हुए मेडिकल एवं नर्सिंग की छात्राओ के लिए दो दिवसीय आत्मरक्षा शिविर का शानदार आयोजन किया गया। इस अवसर पर अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के लिए विभिन्न क्षेत्रो में राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी शानदार उपस्थिति दर्ज कराने वाली 82 महिलाओ एवं बालिकाओ को लक्ष्मीबाई नारी/बालिका शक्ति सम्मान 2021 से नवाजा गया। विश्वविद्यालय के डाॅ सीवी रमन सभागार में आयोजित दो दिवसीय आत्मरक्षा शिविर एवं लक्ष्मीबाई नारी/ बालिका शक्ति सम्मान-2021 समारोह का शुभारम्भ वेंक्टेश्वरा समूह के चेयरमैन डाॅ सुधीर गिरि, प्रतिकुलाधिपति डाॅ राजीव त्यागी, डीन मेडिकल बिगे्रडियर डाॅ सतीश अग्रवाल, नर्सिंग डीन डाॅ एना ब्राउन, विख्यात स्

बागपत के राष्ट्रीय पशु संस्थान को मिली बकरी प्लेग बीमारी की वैक्सीन जाँच की अनुमति

विश्व बंधु शास्त्री


बागपत। शायद आप सुनकर हैरत में पड़ जाएंगे लेकिन यह सच है कि उत्तर प्रदेश के बागपत में देश भर के पशुओं की जान बचाने का काम होता है। जी हां! चौधरी चरण सिंह राष्ट्रीय पशु स्वास्थ्य संस्थान बागपत में प्रयोगशाला में स्वस्थ तथा उत्पादक पशुधन के लिए वैश्विक मापदण्डों के अनुरूप मानक, प्रभावी और सुरक्षित टीका और जैविक उत्पादों की जांच होती है। जांच में खरी मिलने के बाद पशु वैक्सीन बाजार में आती है। इसी क्रम में अब पशु संस्थान को बकरी प्लेग के नाम से प्रचलित पेस्ट डेस पेटिट्स रुमिनेंट्स बीमारी की वैक्सीन की जांच करने की अनुमति मिली है।
जनपद बागपत मुख्यालय के पास 15 साल पूर्व चौधरी चरण सिंह राष्ट्रीय पशु स्वास्थ्य संस्थान की स्थापना हुई थी। दक्षिण एशिया के भारत समेत पाकिस्तान, बांगलादेश, श्रीलंका, नेपाल, भूटान व मालदीव आदि का इकलौता यह संस्थान वर्ष 2006 में चालू हुआ। यहां वैज्ञानिकों की टीम पशुओं की खुरपका-मुंहपका, गलघोंटू वैक्सीन और मुर्गियों की बीमारी में प्रयोग होने वाले रानीखेत टीके वैक्सीन को जांचने का काम अत्याधुनिक तकनीक से करती है।
वैज्ञानिकों की जांच के बाद ही कंपनियों को पशुओं की दवाइयों को बाजार में उतारने की अनुमति मिलती है। वैक्सीन परखने के साथ वैज्ञानिक वायरस और उनके बदलते रूप पर भी पैनी निगाह रखते हैं। फिलहाल यहां भारत में ही बनने वाली वैक्सीन परखने का काम होता है, लेकिन उम्मीद है कि आने वाले दिनों में दूसरे देशों की पशु वैक्सीन की जांच का काम भी होने लगेगा। इसके लिए संस्थान के अधिकारी प्रयासरत हैं। चौधरी चरण सिंह राष्ट्रीय पशु संस्थान के निदेशक डा. प्रवीण मलिक के अनुसार, अन्य देशों में बनी वैक्सीन की जांच करने में भी संस्थान सक्षम हैं लेकिन यह जाँच कार्य भारत सरकार से अनुमति मिलने के बाद होगा। उनका कहना है कि संस्थान के वैज्ञानिक इस दिशा में प्रयासरत हैं कि दूसरे देशों की पशु वैक्सीन की जांच भी यहां होने लगे।
संस्थान के निदेशक प्रवीण मलिक ने बताया कि अब बकरियों की पेस्ट डेस पेटिट्स रुमिनेंट्स बीमारी की वैक्सीन जांचने का जिम्मा भी चौधरी चरण सिंह राष्ट्रीय पशु संस्थान बागपत को मिला है। इस वैक्सीन को परखने का काम वे जल्द शुरू कराएंगे।


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