अंर्तराष्ट्रीय महिला दिवस: हमदर्द लैबोरेटरीज ने महिलाओं और डॉक्टरों को किया सलाम

महिलाओं ने निशुल्क परामर्श लेकर हमदर्द वेलनेस सेंटर्स का लाभ उठाया  युरेशिया संवाददाता   गाजियाबाद। महिलाओं और डॉक्टरों के निरंतर सहयोग को सम्मान देने के लिये हमदर्द लैबोरेटरीज वेलनेस कैम्पेन लॉन्च कर अंतराष्ट्रीय महिला दिवस मना रहा है। यह पहल कोविड-19 महामारी के विरुद्ध सुरक्षा की अग्रिम पंक्ति के तौर पर घर की महिलाओं और डॉक्टरों के निरंतर सहयोग और प्रयासों की प्रशंसा करती है। इस पहल पर अपनी बात रखते हुए हमदर्द लैबोरेटरीज (मेडिसिन डिविजन) के चेयरमैन अब्दुील मजीद ने कहा कि हमदर्द का इतिहास कई छोटी-छोटी कहानियों से भरा है। इस कैम्पेन के हिस्से के तौर पर हमदर्द की लोकप्रिय हेल्थस वैन्स पहल गाजियाबाद व मेरठ की महिलाओं को मुफ्त में स्वाथय संबंमधी परामर्श दे रही है। इस पहल के द्वारा हमदर्द की योजना हजारों महिलाओं तक पहुंचने की है। हमदर्द पीसीओ/पीसीओडी और निजी समस्याओं जैसे स्वास्थ्य संबंधी मामलों के इलाज के लिये सही जानकारी की जरूरत को ध्यान में रखकर देशभर में अपने प्रसिद्ध हमदर्द वेलनेस सेंटर्स पर महिलाओं को मुफ्त परामर्श भी देगा। महिला डॉक्टर्स ने सोमवार को इन सेंटर्स पर रेडियो में वीमन ए

आखिर कब तक  साहूकारों के हाथ लूटता रहेगा किसान : ज्ञानेंद्र त्यागी 


अतुल त्यागी जिला प्रभारी
प्रवीण कुमार रिपोर्टर पिलखुआ


हापुड़। राष्ट्रीय सैनिक संस्था के जिला अध्यक्ष व किसान ज्ञानेंद्र त्यागी ने कहां की  आखिर कब तक  साहूकारों के हाथ लूटता रहेगा किसान  यह प्रश्न एक किसान का है सरकार से कि आखिर घोषणाएं होती रहती हैं लेकिन कभी वह मूर्त रूप नहीं ले पाती। हापुड़ जनपद के कृषि विभाग के अधिकारियों व जिलाधिकारी महोदय से निवेदन कर जानकारी करना चाहता  हूँ कि सरकार द्वारा फसलों जैसे सरसों का समर्थन मूल्य 4425 रूपये प्रति कुंतल, मसूर 4800 रूपये प्रति कुंतल व गेंहू का समर्थन मूल्य 1925 रूपये प्रति क्विंटल किया गया था लेकिन पिछले साल सरसों व मसूर के सरकारी क्रय केन्द्र नहीं खोले गए थे। जिसके कारण किसान बाजार में लगभग 1500 से लेकर 2000 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से बाजार में किसान लुटा था।


इसलिये मैं आपके माध्यम से विभागीय अधिकारियों से जानकारी चाहता  हूँ कि सरकारी क्रय केन्द्र कहां कहां खोले गए हैं  मेरा सभी अधिकारियों से निवेदन है कि जितने भी केंद्र खोले जा रहे हैं उसकी जानकारी किसानों तक दी जाए ताकि किसान अपनी फसल उचित दाम  देखकर अपना कर्ज चुका सके महंगा कर्ज लेकर किसान अपनी फसल उगाता है लेकिन फसल का उचित दाम न मिलने पर किसान कर्ज के बोझ तले दबता चला जाता है। किसान जय भगवान सैनी का कहना है कि उन्हों की फसल खेतों में तैयार खड़ी हैं लेकिन लॉक  डाउन होने के कारण ना तो फसल बाहर जा पा रही है और ना ही लोकल में उन्हों को उचित भाव मिल पा रहा है। जिसके कारण उनकी फसल की लागत भी नहीं आ पा रही है ऐसे में वो कहां से बीज लाएं और कहां से काम करने वाले मजदूरों को उन की मजदूरी दें।


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