सुबह 8 बजे से वोटिंग शुरू, नोटा का नहीं है विकल्प, हर हाल में देना होगा वोट

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मेरठ  ( युरेशिया) । स्नातक एवं शिक्षक चुनाव के लिए आज 1 दिसंबर 2020 को वोट डाले जा रहे हैं। जिसके लिए विक्टोरिया पार्क से सोमवार को ही पोलिंग पार्टी रवाना हुई थीं। जनपद मेरठ में स्नातक के लिए 77 व शिक्षक के लिए 30 बूथ बनाए गए हैं। एक पोलिंग पार्टी में एक पीठासीन अधिकारी व 3 मतदान अधिकारी मौजूद हैं। सुबह आठ बजे से वोटिंग शुरू हो गई है। जो शाम पांच बजे तक चलेगी।अधिकारी भी लगातार बूथ पर निरीक्षण कर रहे हैं। जिलाधिकारी के. बालाजी ने बताया कि मेरठ खंड स्नातक निर्वाचन के लिए मेरठ व सहारनपुर मंडल के सभी नौ जनपदों में मिलाकर 113 मतदान केन्द्र व 372 मतदेय स्थल (सहायक बूथ सहित) बनाये गये हैं। मेरठ खंड शिक्षक निर्वाचन के लिए मेरठ व सहारनपुर मंडल के सभी नौ जनपदों में मिलाकर 111 मतदान केन्द्र व 116 मतदेय स्थल (सहायक बूथ सहित) बनाये गये हैं। मेरठ में स्नातक के लिए 77 बूथ व 31 मतदान केन्द्र तथा शिक्षक निर्वाचन के लिए 30 बूथ व 30 मतदान केन्द्र हैं। उन्होंने बताया कि मतदान प्रातः 8.00 बजे से शाम 5.00 बजे तक होगा। स्नातक के लिए 30 व शिक्षक निर्वाचन के लिए 15 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं। मतपत्र में नोटा

कॉपी-किताबों की महंगाई से अभिभावकों की जेब लडख़ड़ाई  मध्यम परिवार के मुखिया की पगार पड रही कम

 यूरेशिया संवाददाता
 मेरठ । मार्च के महीने में अभिभावकों को हर तरफ खर्च नजर आ रहे हैं। स्कूल की फीस से लेकर कॉपी-किताबों की महंगाई ने घर का बजट बिगाड़ दिया है। कभी किसी पार्टी के एजेंडे में सस्ती शिक्षा दिलाने की बात शामिल नहीं हुई। जबकि देश के विकास की पहली सीढ़ी शिक्षा ही है। कॉपी-किताबों पर बढ़ी महंगाई के कारण अभिभावकों की जेब लडख़ड़ा गई है।
मार्च माह में एक बच्चे की कॉपी.किताब खरीदने के लिए 13,000 से 15,000  हजार रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। अगर दो बच्चे हैं तो एक मध्यम परिवार के मुखिया की पूरी पगार कम पड़ रही है। पढ़ाई पर महंगाई की पड़ताल की गई तो जीएसटी और चीन इसके लिए जिम्मेदार हैं। किताब जीएसटी से मुक्त हैं, लेकिन प्रिंटिंग में इस्तेमाल कागज व इंक पर भारी भरकम जीएसटी के कारण पिछले दरवाजे से किताबों- कापियों पर महंगाई बढ़ी है। कागज पर 12 फीसद व इंक पर 18 फीसद जीएसटी है जबकि दो साल पहले पांच फीसद वैट लगता था, जिससे इतनी महंगी किताबें नहीं होती थीं। अबकी बार किताबें 15 फ ीसद व कापियां 10 फ ीसद तक की महंगी होने से अभिभावकों की कमर टूट गई है। इस साल से चीन को कागज निर्यात करने से कागज महंगा हो गया है। क्योंकि चीन ने अपने देश में प्रदूषण की समस्या के चलते कागज की फैक्ट्री बंद कर दी है। जिससे कागज तीन महीने में 25 फ ीसद और महंगा हो गया है।
एनसीईआरटी की किताबें सस्ती, निजी प्रकाशकों की महंगी
एनसीईआरटी व निजी प्रकाशकों की किताबों के दामों में धरती आसमान का अंतर है। कारण निजी प्रकाशक स्कूलों से साठगांठ करके किताबें पाठ्यक्रम में शामिल कराते हैं, जिससे स्कूलों को मोटा कमीशन मिलता है। अब जिन दुकानों पर इन प्रकाशकों की किताबें होंगी उनसे भी स्कूलों का कमीशन तय है। यही कारण है कि निजी किताबों के दामों में अंतर होता है। एनसीईआरटी की किताबों पर मात्र पांच फ ीसद दाम बढ़े हैं, जबकि निजी किताब अगर 300 रुपये की है तो 15 फ ीसद के हिसाब से 45 रुपये की बढ़ोतरी एक साल में हुई है।

एक साल में कापी-किताब पर महंगाई

पेज पहले         इस साल रुपये
172             40 -48 132 -प्रैक्टिकल 70 80
120               30  - 38
140              रजिस्टर 42 50

एनसीईआरटी की 8वीं तक की किताबों के दाम

विषय       पहले     अब
गणित         55       60
विज्ञान         55       60
हिंदी           55        60
संस्कृत        50        55
अंग्रेजी        55        60
अंग्रेजी स्कूलों में प्राइमरी कक्षा का खर्च
किताबें           4000


 फीस             1200


वार्षिक शुल्क    3000
कंप्यूटर लैब      800
यूनिफ र्म          600
ट्रांसपोर्ट           1200
जूते                 300
मोजे                  50
बोतल               250
बैग                 500
लंच बॉक्स         150
अन्य खर्च         1000
कुल             13,050

कागज व इंक पर है जीएसटी

भले ही किताबें जीएसटी से मुक्त हैं, लेकिन कागज व इंक पर जीएसटी बहुत लगाया है। इसका असर अप्रत्यक्ष रूप से किताबों पर महंगाई के रूप में पड़ा है। चीन को कागज निर्यात करने से तीन महीने में कागज के दाम 25 फ ीसद बढ़े हैं।
  संजीव अग्रवाल पुस्तक विक्रेता, सुभाष बाजार  
निर्यात से बढ़ी है डिमांड
चीन को कागज निर्यात करने से डिमांड बढ़ी हैए जिसका असर अपने देश में पड़ा है। 15 फीसद तक किताबें इस बार महंगी हुई हैं जबकि एनसीईआरटी की आठवीं तक की किताबों पर पांच रुपये वृद्धि हुई है।
. विवेक सिंहल  पुस्तक विक्रेता टाउन कैलाश पुरी
पांच रुपये की हुई है वृद्धि
एनसीईआरटी की किताबों पर पांच रुपये की वृद्धि हुई है जो बहुत ज्यादा नहीं है। एनसीईआरटी में दो तीन विषयों को छोडक़र सभी विषयों की किताबें बाजार में उपलब्ध हैं।
  दीपक रस्तोगी - पुस्तक बिक्रेता सुभाष बाजार


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