4 दिन से लापता युवक की गुमशुदगी की दी तहरीर

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लापता बच्चे का फोटो डॉ असलम/ युरेशिया  बहसूमा। नगर के मोहल्ला चैनपुरा का रहने वाला एक 17 वर्षीय युवक संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया। परिजन 4 दिनों से उसकी तलाश में जुटे हुए थे। लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। गायब हुए बच्चे के पिता ने थाने पर गुमशुदगी दर्ज कराने के लिए तहरीर दी है। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। थाने पर तहरीर देते हुए लापता हुए एक बच्चे के पिता शकील पुत्र सिराजुद्दीन ने बताया कि उसका पुत्र नईम उम्र 17 वर्ष बीते 28 फरवरी को घर से बिना बताए चला गया। जब 1 मार्च की शाम तक घर नहीं लौटा तो उसकी रिश्तेदारी एवं संबंधियों में तलाश की। लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। पीड़ित ने थाने पर गुमशुदगी की तहरीर देते हुए बरामदगी की मांग की है। थाना प्रभारी निरीक्षक मनोज चौधरी का कहना है कि तहरीर के आधार पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

सिनौली निवासियों का महाभारत कालीन होने का इतिहासकार अमित राय जैन का दावा वैज्ञानिकों द्वारा पुष्ट हुआ !



  • बीरबल साहनी संस्थान के वैज्ञानिकों ने सिनौली सभ्यता के प्रमाणों को बताया 3800 साल प्राचीन !


  अमित सैनी


बड़ौत स्थित शहजाद राय शोध संस्थान के निदेशक इतिहासकार डॉ अमित राय जैन के द्वारा किया गया  दावा सही साबित हुआ ! भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण  द्वारा  उत्खनन से प्राप्त प्रमाणों को लखनऊ के बीरबल साहनी इंस्टिट्यूट के विज्ञानियों द्वारा  रासायनिक प्रक्रिया के उपरांत दिए गए कार्बन डेटिंग के परिणामों में 3800 साल पुराना सिद्ध कर दिया है! गौरतलब है की बड़ौत निवासी इतिहासकार अमित राय जैन प्रारंभ से सिनौली के निवासियों और यहां से मिल रहे प्रमाणों को महाभारत काल का कहते आ रहे हैं ! गौरतलब है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा उत्खनन से प्राप्त प्रमाणों को बीरबल साहनी इंस्टिट्यूट, कैंब्रिज विश्वविद्यालय एवं डेक्कन कॉलेज पुणे में कार्बन डेटिंग के लिए भेजा गया था ताकि सिनौली सभ्यता के परमाणु का कालक्रम निर्धारित किया जा सके! सबसे पहले बीरबल साहनी इंस्टिट्यूट लखनऊ के विज्ञानियों द्वारा रासायनिक परीक्षण के उपरांत सिनौली के प्रमाणों को अट्ठारह सौ वर्ष ईसा पूर्व यानी 3800 साल प्राचीन माना है ! अभी तक भारतीय इतिहासकारों ने भारतीय इतिहास की जो काल गणना की है उसके अनुसार महाभारत का काल निर्धारण करीब 3800 से 4000 वर्ष के आसपास माना है, अगर सिनौली सभ्यता के निवासियों के द्वारा प्रयोग में लाए गए साजो सामान की काल निर्धारण में आयु 38 साल के आसपास निर्धारित होती है तो इतिहासकार अमित राय जैन का दावा सिद्ध होता है!


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