एनीमिया मुक्त भारत अभियान: महिलाओं को एनीमिया से मुक्ति दिलाने को विशेष अभियान



  • टी-3 (टाक-ट्रेस-ट्रीटमेंट) कैंप के माध्यम से किया जाएगा जागरूक


 यूरेशिया संवाददाता


नोएडा। महिलाओं और बच्चों में खतरनाक हद तक बढ़ चुके रक्तअल्पता (एनीमिया) की स्थिति में सुधार लाने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा बड़े पैमाने पर एनीमिया मुक्त भारत अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान में कई विभागों को शामिल किया गया है। स्वास्थ्य विभाग इसका नोडल है। अभियान के तहत गांव-शहर के बच्चों और 15 से 49 आयु वर्ग की महिलाओं की खून की जांच की जाएगी। एनीमिक पाये जाने पर उनका जरूरी उपचार दिया जाएगा। कार्यक्रम को गति देने के लिए विशेष सघन अभियान इन्फार्मेशन, एजूकेशन, कम्युनिकेशन (आईईसी) चलाया जा रहा है। गौतमबुद्ध नगर में स्कूलों, आंगनबाड़ी केन्द्रों पर बच्चों को आयरन की गोली खिलाने का काम शुरू हो गया है। महिलाओं को टी-3 कैम्प के माध्यम से एनीमिया की जानकारी दी जाएगी और आयरन की गोलियां खिलायी जाएंगी।  इस कार्यक्रम का उद्देश्य सभी आयु वर्ग के लाभार्थियों में एनीमिया को वर्ष 2022 तक प्रति वर्ष 3 प्रतिशत की दर कमी लाना है।


एनीमिया मुक्त भारत की प्रभारी अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. शशि कुमारी ने बताया गर्भवती महिलाओं की एनीमिया जांच के लिए टी-3 (टाक-ट्रेस-ट्रीटमेंट) कैम्प का आयोजन जाएगा। इसमें 15 से 18 जनवरी तक आंगनबाड़ी, एएनएम, आशा कार्यकर्ताओं द्वारा गृह भेंट के दौरान गर्भवती महिलाओं को टी-3 कैम्प के बारे में बताया जाएगा। 20 व 21 जनवरी को टी-3 कैम्प का आयोजन किया जाएगा। इसमें महिलाओं के स्वास्थ्य की जांच होगी। जांच में एनीमिया पर विशेष ध्यान रखा जाएगा। 22 से 31 जनवरी तक  टी-3 कैम्प में चिह्नित गर्भवती महिलाओं को आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व एएनएम गृह भ्रमण कर आयरन की गोली खाने के बारे में बताएंगी। इसके अतिरिक्त जरूरत के अनुसार उन्हें चिकित्सकों से उपचार की सलाह देंगी।


डा. शशि का कहना है कि एनीमिया जैसे मामलों में सबसे बड़ी समस्या यह है कि लोगों को यह मालूम ही नहीं होता कि वह एनीमिक हैं । बच्चों के खून में प्रति डेसीलीटर 11 ग्राम से कम हीमोग्लोबिन और महिलाओं के खून में प्रति डेसीलीटर 12 ग्राम से कम हीमोग्लोबिन होने को एनीमिया कहते हैं। खून में ऑक्सीजन की कम आपूर्ति से अंदरूनी अंग जैसे किडनी, लिवर आदि को क्षति पहुंच सकती है। एनीमिया के लक्षण में थकान, सिर दर्द, कमजोरी, दिल की धड़कन तेज होना या अनियमित होना, सांस लेने में दिक्क्त आदि शामिल है। हीमोग्लोबिन कम होने से शरीर पीला पड़ जाता है।


नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे -4 के अनुसार जनपद गौतमबुद्ध नगर में 6 से 59 माह आयुवर्ग के 68 फीसदी बच्चे एनीमिक हैं। इसमें शहर में 71.2 फीसद और गांव में 63 फीसद बच्चे एनीमिक हैं। इसी तरह 15 से 49 वर्ष की उम्र की 58.2 फीसदी महिलाए एनीमिक हैं। इसमें शहर में 58.9 फीसद, गांव में 56.6 फीसद महिलाएं एनीमिक हैं। इसके अलावा 15 से 49 उम्र की 49.7 फीसद गर्भवती महिलाएं एनीमिक हैं। इनमें शहर में इनका प्रतिशत 46.2, गांव में 54.8 है।


उन्होंने बताया जिला अधिकारी की अध्यक्षता में एक कमेटी बनायी गयी है, जिसके तहत नगरीय व ब्लॉक स्तर पर चिकित्सा विभाग व बेसिक शिक्षा विभाग, एनसीसी, एनएसएस, स्काउट्स एवं गाइड, पंचायती राज, एनजीओ के पदाधिकारियों को कमेटी में शामिल किया गया है। यह अभियान 31 मार्च तक चलेगा।


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