4 दिन से लापता युवक की गुमशुदगी की दी तहरीर

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लापता बच्चे का फोटो डॉ असलम/ युरेशिया  बहसूमा। नगर के मोहल्ला चैनपुरा का रहने वाला एक 17 वर्षीय युवक संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया। परिजन 4 दिनों से उसकी तलाश में जुटे हुए थे। लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। गायब हुए बच्चे के पिता ने थाने पर गुमशुदगी दर्ज कराने के लिए तहरीर दी है। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। थाने पर तहरीर देते हुए लापता हुए एक बच्चे के पिता शकील पुत्र सिराजुद्दीन ने बताया कि उसका पुत्र नईम उम्र 17 वर्ष बीते 28 फरवरी को घर से बिना बताए चला गया। जब 1 मार्च की शाम तक घर नहीं लौटा तो उसकी रिश्तेदारी एवं संबंधियों में तलाश की। लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। पीड़ित ने थाने पर गुमशुदगी की तहरीर देते हुए बरामदगी की मांग की है। थाना प्रभारी निरीक्षक मनोज चौधरी का कहना है कि तहरीर के आधार पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

छते हुई आबाद ,निगाहें रही आसमान पर  हर तरफ गूंजा ----वो काटा


यूरेशिया संवाददाता


मेरठ। बसंत पंचमी उत्सव के मद्देनजर आसमान रंग बिरंगी पतंगों से अटा रहा । इसके लिए युवाओं और पतंगबाजी के शौकीनों ने अपनी तैयारी पहले से ही कर ली। अगर कहा जाए तो पतंगों का कारोबार इस साल करोड़ों के पार हुआ है ।युवाओं ने दिन भर छतो पर डी जे बजा कर मनोरजन किया ओर साथ ही पतंग बाजी का लुत्फ़ उठाया । इधर, युवाओं की पहली पसंद मोदी और योगी के साथ ही फिल्म स्टारों की फोटो वाली पतंगें रहीं। जबकि छोटे बच्चों को कार्टून वाली पंतगों ने खूब लुभाया। वहीं, सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद चाइनिज मान्झे का उपयोग हुआ ।बसंत पंचमी पर मां शारदे की पूजा-अर्चना के साथ शहर में पतंगबाजी की भी परंपरा है। ।गुरुवार को कुछ  दुकानदारों के पास तो पतंगों का स्टॉक खत्म हो गया था। वहीं फिल्म स्टार की फोटो वाली पतंगें भी युवाओं की पहली पंसद रही। बसंत पंचमी  भले ही कल है  लेकिन युवाओं और बच्चों ने पतंगबाजी की शुरुवात सुबह से ही करके  इसका शगुन कर लिया। सुबह से ही आसमान में सतरंगी पतंगे इठलाती नजर आ रही है  और हर गली मुहल्ले में वो काटा  की आवाज  की शुरुवात शुरू हो गई ही । ठंडी सुबह के साथ ही पतंगबाजी का सिलसिला भी शुरू हो गया था जो सूर्यास्त होने तक लगातार चलता नजर आयाबाजार में सजी पतंग की दुकानों पर भी पतंग और मंझा खरीदने वालों की भीड़ आज भी नजर आ रही है। पतंगबाजों में एक दूसरे की पतंग को काटने, पेच लड़ाने की होड़ लग रही है । बसंत पंचमी  के पर्व पर पतंग उड़ाने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है और इस पर्व पर युवा, बुजुर्ग, बच्चों समेत युवतियों  भी पतंग उड़ाने का आनंद लेती नजर आई । घरों की छतों और बड़े बड़े स्पीकर लगाकर गानों के आनंद के साथ लोगों ने पूरा दिन पतंगे उड़ाई। पतंगबाज पतंगों के साथ अपने हुनर का भी प्रदर्शन करते रहे। आसमान में उड़ रही किसी दूसरी पतंग की सतह तक अपनी पतंग को ले आने के बाद मंझे पर झटका देकर दूसरे की पतंग काटने के साथ ही उनकी पतंग फिर से आसमान की सैर करने लगती थी। हालांकि जिनकी पतंगे कट जाती थी वे भी हार नहीं मान रहे थे। एक पतंग कटी नहीं की दूसरी को छोड़इया दे दी जाती थी। जैसे ही दूसरे की पतंग कटती, वो काटा  की आवाज गूंज उठती। कटी पतंग को लूटने वाले भी पीछे नहीं थे। हाथों में बड़े बड़े बांस लेकर समूह बनाकर लोग पतंगों को लूटते नजर आए। -


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